कार्बन डाई ऑक्साइड का चौथा सबसे बड़ा उत्सर्जक है भारत
एक अध्ययन में यह बात सामने आई है कि कार्बन डाई ऑक्साइड गैस उत्सर्जन के मामले में भारत दुनिया में चौथे पायदान पर है।
इसमें कहा गया है कि कार्बन डाई ऑक्साइड गैस उत्सर्जन के मामले में भारत की वैश्विक भागीदारी सात प्रतिशत है।
इस सूची में चीन 27 फीसदी हिस्सेदारी के साथ अव्वल बना हुआ है। अमेरिका 15 फीसदी के साथ दूसरे, यूरोपीय संघ 10 फीसदी के साथ तीसरे स्थान पर है। उत्सर्जन में शेष विश्व का पिछले साल कुल योगदान 41 प्रतिशत रहा था। यह आकलन ‘ग्लोबल कार्बन प्रोजेक्ट’ में किया गया है।
भारत के बाद इस सूची में क्रमश: रूस, जापान, जर्मनी, ईरान, सऊदी अरब और दक्षिण कोरिया को रखा गया है।
अध्ययन में कहा गया है कि भारत में साल 2018 में उत्सर्जन में 6.3 प्रतिशत तक की वृद्धि हो सकती है।
भारत की ऊर्जा आवश्यकता को पूरा करने में कोयला अभी भी मुख्य भूमिका निभा रहा है और ऊर्जा की बढ़ती जरूरतों को देखते हुए यह कहना मुश्किल है कि धूप या हवा से बिजली बनाने का काम इसकी जगह ले सकता है।
युवाओं के लिए राष्ट्रीय चुनौती- "भारत के लिए संकल्प- प्रौद्योगिकी का उपयोग कर रचनात्मक समाधान"
केन्द्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी और विधि व न्याय मंत्री, रविशंकर प्रसाद ने स्कूल के छात्रों के लिए 'भारत के लिए विचार - प्रौद्योगिकी का उपयोग कर रचनात्मक समाधान' कार्यक्रम शुरू किया है।भारत के लिए संकल्प" के माध्यम से इन छात्रों को नई स्वदेशी प्रौद्योगिकियों का उपयोगकर्ता से निर्माता बनने में मजबूत और जरूरी मदद मिलेगी जिससे कि वे अपने समुदाय की स्थानीय समस्याओं को सुलझाने और उसका समाधान करने के लिए सोचने में सक्षम बन सकेंगे।
इस चुनौती का निर्माण और प्रारंभ इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी के राष्ट्रीय ई-गवरनेंस विभाग एवं इंटेल इंडिया के साझेदारी से और मानव संसाधन विकास मंत्रालय के स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग (डीओएसई एंड एल) के सहयोग से किया गया है।
डीओएसई एंड एल पूरे देश के स्कूलों में इस राष्ट्रीय चुनौती की पैठ बनाने के लिए राज्य शिक्षा विभागों, एनवीएस, केवीएस और सीबीएसई के अधिकारियों तक अपनी पहुंच बनाएगा।
यह राष्ट्रीय चुनौती पूरे देश के सभी 29 राज्यों और 7 केंद्र शासित प्रदेशों में कक्षा 6 से लेकर 12 वीं के छात्रों के लिए खुली हुई है जिसका उद्देश्य अगले 3 महीनों में कम से कम एक मिलियन युवाओं तक पहुंचने का है।
9 जनवरी, 2019 से पुणे में खेलो इंडिया युवा खेलों का आयोजन किया जाएगा
'खेलो इंडिया स्कूल खेल' की सफलता को देखते हुए खेल मंत्रालय ने कॉलेज के छात्रों को इसमें शामिल करने और इसका नाम' खेलो इंडिया युवा खेल' करने का फैसला किया और आगामी चरण की मेजबानी महाराष्ट्र को सौंपी।केन्द्रीय खेल मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने महाराष्ट्र के शिक्षा एवं खेल मंत्री विनोद तावड़े की मौजूदगी में इन खेलों की मेजबानी राज्य के पुणे शहर को देने की घोषणा की।
खेलो इंडिया युवा खेल का आयोजन अगले साल 9 से 20 जनवरी तक होगा जिसमें देशभर से लगभग नौ हजार खिलाड़ियों का पंजीकरण कराया है।
राठौड़ ने कहा, खेलो इंडिया स्कूल खेलों का मकसद कम उम्र में खिलाड़ियों को ऐसा मंच देना है जहां वह अंतरराष्ट्रीय माहौल में अपनी प्रतिभा दिखा सके। इसकी सफलता को देखते हुए सरकार ने इसमें कॉलेज के छात्रों को भी शामिल करने का फैसला किया जिससे अधिक युवाओं को इन खेलों में अपनी प्रतिभा दिखाने का मौका मिल सके।
मोहाली में सतत जल प्रबंधन पर पहला अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन
भाखड़ा ब्यास प्रबंध बोर्ड (बीबीएमबी), जल संसाधन मंत्रालय नदी विकास और गंगा संरक्षण की चलाई जा रही राष्ट्रीय हाइड्रोलॉजी परियोजना (एनएचपी) के तत्वावधान में सतत जल प्रबंधन पर प्रथम अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन 10 दिसंबर और 11 दिसंबर को होगा।बीबीएमबी के अनुसार इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस, मोहाली में आयोजित सम्मेलन में भारत और विश्व-भर के प्रतिनिधियों के भाग लेने की संभावना है।
हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल आचार्य देवव्रत सम्मेलन में मुख्य अतिथि होंगे और केंद्रीय जल संसाधन विभाग के सचिव यू.पी. सिंह अतिथि होंगे।
सम्मेलन का उद्देश्य दुनिया-भर से शिक्षा जगत, उद्योगों एवं अनुसंधान संस्थानों और अन्य संबद्ध क्षेत्रों के जाने माने जल संसाधन विशेषज्ञ सतत जल प्रबंध के विविध पहलुओं पर विचार विमर्श करना है।
स्टार्टअप सूचीबद्धता नियमों में छूट देगी सेबी
स्टार्टअप कंपनियों को शेयर बाजार में सूचीबद्ध कराने में तेजी लाने के लिये बाजार नियामक सेबी ने सूचीबद्धता के नियमों में बदलाव करने का फैसला किया है।सेबी की ई-कॉमर्स, डेटा एनालिटिक्स और जैव-प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में काम करनी वाली नये नये विचारों पर आधारित कंपनियों को पूंजी जुटाने और शेयर बाजार पर सूचीबद्ध करने के लिये कुछ रियायत देने की योजना है।
इन योजनाओं में 'इंस्टीट्यूशनल ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म' का नाम बदलकर 'इन्वेटर्स ग्रोथ प्लेटफॉर्म' करना भी शामिल है।
नियमों में दी गयी ढील से मौजूदा प्लेटफॉर्म को लेकर बाजार की बेरुखी को दूर करने में मदद मिलेगी।
इसमें हितधारकों की मांग के आधार पर नियमों को सरल बनाया गया है ताकि भारतीय स्टार्टअप क्षेत्र में गतिविधियों के विस्तार को देखते हुये मंच अधिक सुलभ बनाया जा सके।
बता दें, भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने स्टार्टअप प्लेटफॉर्म की समीक्षा के लिये इस साल जून में एक विशेषज्ञ समूह का गठन किया था।
रणजी ट्रॉफी : अजय रोहेरा ने रचा इतिहास
मध्य प्रदेश और हैदराबाद के बीच इंदौर के होल्कर स्टेडियम में खेले गए रणजी ट्रॉफी के पांचवे राउंड के मुकाबले में मध्य प्रदेश की तरफ से सलामी बल्लेबाज अजय रोहेरा ने 267 रन की नाबाद पारी खेली।बता दें कि 21 वर्षीय रोहेरा का यह डेब्यू मैच था और अपने पहले ही मैच में उन्होंने विश्व रिकॉर्ड बना दिया। रणजी क्रिकेट के अजय ने 84 वर्ष के इतिहास में उन्होंने अपने डेब्यू मैच में सबसे बड़ा व्यक्तिगत स्कोर अपने नाम किया।
गौरतलब है कि रणजी क्रिकेट के इतिहास में अब तक किसी भी बल्लेबाज ने अपने डेब्यू मैच में इतना बड़ा स्कोर नहीं बनाया था। अजय रोहेरा ने 345 गेंदों में 21 चौके और पांच छक्के की मदद से नाबाद 267 रन बनाए।
टूटा 123 साल पुराना रिकॉर्ड
- दरअसल, 1895 में प्रथम क्रिकेट की शुरुआत हुई थी और तब से लेकर अब तक 123 वर्षों में किसी भी बल्लेबाज ने अपने डेब्यू मैच में इतना बड़ा स्कोर नहीं हासिल किया था।
अजय ने नाबाद 267 रन की पारी अपने नाम एक नया विश्व कीर्तिमान स्थापित किया। इससे पहले प्रथम श्रेणी क्रिकेट में डेब्यू करते हूए सबसे बड़ा स्कोर अमोल मजूमदार के नाम था। उन्होंने साल 1993 में 260 रनों की की बेहतरीन पारी खेली थी।
आमतौर पर दवाओं के रूप में इस्तेमाल किए जाने वाले चिकित्सा उपकरणों को किया गया सूचित
सरकार ने ड्रग्स और प्रसाधन सामग्री अधिनियम के तहत दवाओं के रूप में आमतौर पर इस्तेमाल किए जाने वाले चिकित्सा उपकरण जैसे नेबुलाइजर्स, ब्लड प्रेशर मॉनीटर, डिजिटल थर्मामीटर और ग्लूकोमीटर को अधिसूचित किया है।यह सरकार को उनकी गुणवत्ता और प्रदर्शन सुनिश्चित करने में सक्षम बनाएगा।
भारतीय ड्रग कंट्रोलर जनरल (Drug Controller General of India) जनवरी 2020 से इन उपकरणों के आयात, निर्माण और बिक्री को नियंत्रित करेगा।
देश की सबसे बड़ी दवा सलाहकार निकाय डीटीएबी ने इसे ड्रग कानून के दायरे में शामिल करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।
वर्तमान में, देश के दवा नियामक द्वारा गुणवत्ता के लिए केवल 23 चिकित्सा उपकरणों की निगरानी की जाती है।

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